गयाकोठा तीर्थ
पौराणिक एवं धार्मिक नगरी उज्जैन में स्थित गयाकोठा का अलग ही महत्व है क्योंकि इसका सीधा संबंध श्रीकृष्ण से है। गयाकोटा जैसा कि नाम से स्पष्ट है, गया कोठा में अपने पितरों की मुक्ति की कामना के लिए लोग प्रार्थना करते हैं। इसके पीछे एक कथा है कि भगवान श्रीकृष्ण और बलराम ने उज्जैन में गुरू सांदीपनि से शिक्षा ग्रहण की थी।
गयाकोठा तीर्थ ..... जहां विद्यमान हैं भगवान विष्णु के सहस्त्र चरण
स्कंद पुराण के अवंतिका खंड के अनुसार शिक्षा प्राप्त करेन के बाद जब श्रीकृष्ण ने गुरू सांदीपनि से कहा कि आपको गुरू दक्षिणा में क्या दे सकता हूॅ, तब गुरू माता अरूंधति ने श्रीकृष्ण से कहा था कि उनके 7 गुरू भाइयों को गजाधर नामक राक्षस अपने साथ ले गया है। वे उन सभी को लेकर आए। तब श्रीकृष्ण ने कहा कि छह भाइयों का गजाधर वध कर चुका है। एक अन्य गुरू भाई को उसने पाताल लोक में छुपाकर रखा है। वे उसे ला सकते है। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण ने गजाधर का वध किया था और उक्त गुरू भाई को उनके पास लाकर सुपुर्द किया था। तब गुरू माता ने 6 गुरू भाइयों के मोक्ष का सरल उपाय बताने को कहा था। उनका कहना था कि गुरू सांदीपनि नदी पार नहीं कर सकते। तब श्रीकृष्ण ने बिहार के गया में स्थित फल्गु नदी को गुप्त रूप से उज्जैन में प्रकट किया था। यह अंकपात मार्ग स्थित सांदीपनि आश्रम के पास स्थित है। यह स्थान ‘गयाकोटा‘ कहालात है।
गयाकोटा तीर्थ पर भगवान श्रीविष्णु के सहस्त्र चरण विद्यमान है। जिन पर दुग्धाभिषेक कर यहां आने वाले अपने पितरों की मुक्ति और मनोवांछित फल प्राप्त करते है। गयाकोटा मंदिर में पितरों की शांति के निमित भगवान श्री विष्णु के सहस्त्र चरण कमलों में दूध और जल चढ़ाने से अधिक पुण्यलाभ मिलता है और इसका श्राद्ध पक्ष में और भी महत्व बढ़ जाता है। श्राद्धपक्ष के प्रारंभ में और सर्वपितृ अमावस्या पर यहां पूजन करने वालों की अधिक तादाद होती है मगर अन्य दिनों में भी यहा लोग बडी संख्या में आकर दर्शन लाभ लेते है।
माना जाता है कि भगवान श्री विष्णु के ये चरण आदिकाल से है। इनका पूजन कर भक्त अपने को धन्य मानते है। दूसरी ओर मंदिर के बाहर एक तालाब है। जिसमें पर्व विशेष पर महिलाओं द्वारा स्नान किया जाता है। मंदिर भी है। इस मंदिर के दर्शन करने और यहा अभिषेक करवाने से व्यक्ति समस्त प्रकार के ऋणों और बंधनों से मुक्त हो जाता है। यूं तो गयाकोठा मंदिर में श्रद्धालु अपनी इच्छा से जो चढ़ा देते है स्वीकार हो जाता है मगर पितरों की शांति के निमित भगवान श्री विष्णु के सहस्त्र चरण कमलों में दूध और जल चढ़ाने से अधिक पुण्यलाभ मिलता है।
हिंदू मान्यता में श्राद्ध का बुहत महत्व है। शाब्दिक अर्थ में श्राद्ध अर्थात् श्रद्धा से किया गया कोई कर्म जो हम अपने पूर्वजों की इच्छा पूर्ति और सद्भति के निमित करते है। अर्थात् जिस तरह से आजीवन हम अपने माता पिता की सेवा करते है। उसी प्रकार उनकी मृत्यु हो जाने के बाद आत्मा की परमगति और उनके प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए उन्हें श्राद्ध के माध्यम से पूजा जाता है। माना जाता है कि श्राद्ध न करने पर पितरों की अतृप्त इच्छाओं के कारण वासनायुक्त पितर अनिष्ट शक्तियों के दास बन जाते है।
इस रूप में संवरेगा गयाकोठा तीर्थ
प्राचीन अवंतिका नगरी जो वर्तमान में उज्जैन के नाम से प्रचलित है के उत्तर दिशा में गयाकोठा मंदिर स्थित है। उक्त मंदिर की पौराणिक महत्ता है, जिसका स्कंद पुराण के अवंतिका खंड में विस्तृत उल्लेख किया गया है। मंदिर अत्यंत प्राचीन होकर उज्जयिनी क्षेत्र के पारंपरिक वास्तुशिल्प के साथ पूर्व प्रचलित निर्माण सामग्रियों (चूना आदि) से निर्मित है, जो वर्तमान में समयानुसार अपनी उपयोगिता खो चुका है एवं इस हेतु मंदिर का जीर्णोद्धार किया जाना अत्यंत आवश्यक था। म.प्र. शासन के माध्यम से म.प्र. गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल संभाग उज्जैन द्वारा गयाकोठा तीर्थ में मंदिर निर्माण के साथ क्षेत्र की विकास योजना तीन चरणों में तैयार की गई है, जिसकी कुल लागत 22 करोड़ रू. आंकलित हुई है। वर्तमान में म.प्र. शासन द्वारा प्रथम चरण के निर्माण की प्राशासकीय स्वीकृति 10.63 करोड़ की म.प्र. गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल संभाग उज्जैन को प्रदान की गई है, जिसके अंतर्गत प्रमुख रूप से तीर्थ यात्रियों की सुविधा एवं श्राद्ध पूजन आदि कार्यो हेतु विशेष रूप से स्थान निर्मित किए गए है।- मंदिर का नवीन रूप से निर्माण कार्य जो सेंड स्टोन से निर्मित होगा।
- पिंड सेरेमनी ब्लॉक का निर्माण कार्य किया गया है, जिसमें श्रद्धालुजन सुविधा के साथ श्राद्ध कर्म संपादित कर सकेंगे।
- छतरियों को निर्माण कार्य सेण्ड स्टोन से निर्मित किया जा रहा है, जिसमें समस्त परिवारजन एक साथ सम्मिलित होकर बैठ सकेंगे।
- श्राद्ध कर्म पूजन सामग्री के विसर्जन हेतु पृथक से बिंदु सरोवर कुंड का निर्माण काय्र किया जा रहा है, जिसके कारण पौराणिक तालाब स्वच्छ बना रहे। इस बिंदु सरोवर में फिल्टरेशन प्लांट भी लगाया जाएगा ताकि कुंड का पानी स्वच्छ रहें।
- तीर्थ यात्रियों की सुविधा हेतु दुकानों का निर्माण कार्य भी किया गया है।
- तालाब के आसपास पवित्र वृक्ष भी लगाए जाएंगे एवं सम्पूर्ण परिसर को कंपाउंड वॉल एवं मुख्य द्वार से सुसज्जित किया जा रहा है।
उक्त सम्पूर्ण योजना 7 एकड़ में योजनाबद्ध की गई है। जिसमें द्वितीय एवं तृतीय चरण निर्माण योजनांतर्गत मल्टी फेसेलिटी हॉल, गजिबों का निर्माण कार्य तथा पार्क एवं लेण्ड स्केपिंग का कार्य प्रस्तावित है। सम्पूर्ण योजना क्रियान्वयन उपरांत उज्जयिनी शहर हेतु अतुलनीय सौगात के रूप में प्रस्तुत होगी।
